बड़े पद पर आसीन बड़े भाई साहब के चेहरे को ध्यान से देखते हुए विजय ने पूछ ही लिया – खोये खोये से क्यों हैं ..? आप कुछ कहना चाहते हैं बड़े भैया | सुजय जी जैसे फट पड़े.. विजय, तुमने क्या अपना सर्वनाश ही करना ठान लिया है | मूर्खता की भी कोई हद होती है ! किराये के छोटे से घर में रहते हो, छोटी सी नौकरी करते हो, तीन बच्चे पहले से ही हैं, और तुम्हारी पत्नी फिर से गर्भवती है | बच्चों को सिर्फ पैदा करना ही नहीं होता उन्हें अच्छे सभ्य संस्कार, अच्छी शिक्षा, अच्छा वातावरण भी देना होता है | और तुम दोनों एक के बाद एक बस बच्चे पैदा किये जा रहे हो.. तुम दोनों भी पढ़े लिखे हो फिर यह सब क्या है ? सुजय जी अपना मन हल्का करने के बाद शांत हो गए थे | हलकी मुस्कराहट और झिझक के साथ विजय ने उत्तर दिया.. अरे भैया..आप इतनी सी बात को लेकर परेशान हो.. रम्या और मैंने यह फैसला सोच समझ कर ही लिया है | अनुभा, अर्जुन और शिवम् तीनों अच्छे स्कूल में पढ़ रहे हैं , घर छोटा ही सही पर हम सब खुश और एक दूसरे के साथ हँसते खेलते रहते हैं | हाँ मेरी छोटी सी नौकरी में तनाव तो बहुत हैं पर मैं उन्हें घर आकर भूल जाता हूँ और ख़ुशी से आँखे चमकाते हुए विजय ने कहा, हम तो बस संतुलन बना रहे हैं | बेवकूफ ही हो दोनों.. बुदबुदाते हुए सुजय जी अपनी नयी कार की सीट में धंस गए और ड्राईवर को चलने का इशारा किया | किसी ने सच ही कहा है, मूर्खों को समझाना व्यर्थ ही है, इनको जीवन की परिभाषा कभी समझ नहीं आएगी |
पंख लगा कर उड़ते समय ने कब वर्षों का सफ़र तय कर लिया, पता ही नहीं चला | आज विजय की छोटी बेटी डाक्टर प्रज्ञा की शादी है | बड़ी लड़की अनुभा जो कि इसरो में वरिष्ठ वैज्ञानिक है अपने पति माधवन के साथ आई है | अर्जुन प्रशासनिक अधिकारी है और शिवम् ने कुछ वर्ष टी सी एस में काम करने के बाद अपना स्टार्ट-अप आरम्भ किया, आरंभिक विफलताओं के बाद आज सैकड़ों लोग उसके साथ काम करते हैं | विजय और रम्या जब घूम नहीं रहे होते तो अपने घर में अपने पूरे परिवार के साथ खुश और हँसते खेलते रहते हैं | बताने की तो आवश्यकता ही नहीं है कि आज घर बड़ा है | सुजय जी जो आज अकेले हैं, उनका बेटा अमेरिका में और बेटी ऑस्ट्रेलिया में बस गए हैं, पत्नी ने दो वर्ष पूर्व जीवन चक्र पूरा कर लिया था ,कभी कभी अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया जाते हैं पर वहां बच्चों के व्यस्त जीवन से सामंजस्य नहीं बना पाते, आज इस शादी में फिर कुछ खोये-खोये से हैं और सभ्यता, शिक्षा, परिवार और जीवन की नयी परिभाषा बनाने में उलझे हुए हैं | तभी अर्जुन का नन्हा बेटा आकर उनकी अंगुली खींचता हुआ तुतलाता है.. बदे दादू .. बदे दादू .. तलों आपतो दादू बुला लहे हैं..
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