चेतावनी : यह पोस्ट आपको थोडा बड़ा कर सकती है | यदि बचपन में ही आनंद आ रहा हो  तो इसे नहीं पढ़ें |

सच यह है कि किसी स्ट्रीम से कोई फर्क ही नहीं पड़ता | जीवन में कामयाबी स्ट्रीम पर नहीं बल्कि आप जो करते हैं उसे कैसा करते है इस पर निर्भर करती है |स्ट्रीम की ही बात हो तो आपके लिए कक्षा 11 में वही स्ट्रीम सबसे अच्छी है, जिसमें आप सबसे अच्छे हैं | शब्दों पर ध्यान दीजिये – जिसमें आप सबसे अच्छे हैं.. न कि जिसमें आप सबसे अच्छा होना चाहते हैं या हो सकते हैं| यदि नहीं मिल रही है तो इसका एक ही अर्थ है कि स्कूल को आपकी चाहत पर यकीन नहीं हो रहा है | शायद उन्हें लग रहा है कि आपकी चाहत झूठी है | वैसे तो इंसान जो चाहे कर सकता है लेकिन चाहतों का पीछा करना इतना ही आसान होता तो शायद यह सवाल भी नहीं होता |फिर भी इस प्रश्न का एक अच्छा उत्तर खोजने की कोशिश करते हैं |

आप किसी भी बोर्ड के विद्यार्थी रहे हों, कक्षा 10 तक का पाठ्यक्रम सामान्य ही होता है, और इस पाठ्यक्रम के साथ 10 वर्ष बिताने के बाद आपने अब तक कैसा किया है.. क्या क्या सीखा है.. क्या सीखे हुए को प्रयोग करना भी सीखा है.. ये सब जान लेना बनता है, आखिर आप भी तो दुनिया में सभी को वो जो करते हैं उसी से जानते हैं| तो जिन टीचर्स ने आपको कक्षा 9 और 10 में पढ़ाया है उन से सलाह लीजिये क्योंकि आप कैसा करते हैं और क्या कर सकते हैं दोनों बातें उन्हें अच्छे से पता होती हैं | हो सकता है किसी एक दो से आप बात न करना चाहें लेकिन कुछ एक की सलाह लेना बनता है |

वर्तमान मूल्यांकन पद्धति विद्यार्थी के हित में बनायी जाती है इसलिए उसमें अधिक स्कोर लाना,  चाहे आपके बारे में सच बताये या न बताये, कम स्कोर आपके बारे में निश्चित जानकारी देता है | स्कोर्स बहुत महत्त्वपूर्ण नहीं होते लेकिन ये एकदम ही महत्त्वहीन भी नहीं होते हैं |अतः विभिन्न विषयों में अपने स्कोर्स पर अवश्य ध्यान दें | कम स्कोर के लिए कोई बहाना अपने मन को नहीं बनाने दें | आप चाहे बीमार हो गए हों , इस बार अच्छे से नहीं पढ़ पाएं हों , टीचर ही अच्छा न मिला हो, एग्जाम के समय बिजली, गर्मी और मच्छर जैसी समस्याएं रही हों, लॉक डाउन की वजह से सब गड़बड़ हुआ हो.. अच्छे और स्वीकार्य बहानों पर एक अलग से पुस्तक लिखी जा सकती है |

अच्छे स्कोर के बाद भी यदि मामला आपके पक्ष में जाता नहीं दिख रहा तो फिर पिछले दस वर्षों के अपने कमिटमेंट पर ध्यान देना होगा | आने वाले वर्षों में चाहे आप चाँद तारे तोड़ ला सकते हों, अभी तक वास्तव में आपने क्या किया है इस पर अवश्य ही ध्यान दिया जाएगा | दिया भी जाना चाहिए.. आखिर अब आप बच्चे नहीं रहे हैं.. दुनिया के सच अब आपको सीखने ही होंगे | मात्र दो वर्षों के बाद दुनिया बिना भावनाओं के बस यही देखने वाली है कि आपने क्या किया है | अब आप इतने बड़े हो गए हैं कि पास्ट को एकदम से नज़र अंदाज नहीं किया जाएगा | अच्छे कॉलेज, अच्छे कोर्सेज सबके लिए कम्पटीशन होंगे.. यहाँ सर्वाइवल ऑफ़ फिटेस्ट ही चलेगा |तो थोड़ी गंभीरता अब तो बनती ही है |

और यदि अपनी चाहत को ही पूरा करने की धुन आपने ठान ली है तो क्लास 9 और 10 की किताबें उठा कर एक महीने के लिए जुट जाइए| कुछ अच्छा कर दिखाइये और फिर स्कूल जाकर रिक्वेस्ट कीजिये कि आपको एक बार और जांचा परखा जाए | यदि आपने ईमानदार प्रयास किये होंगे तो आपको इगनोर नहीं किया जाएगा | असहमति से निपटने का एक ही तरीका होता है – या तो सहमत हो जाओ या सहमत कर लो | यहाँ ताकत ओर इमोशनल अत्याचार का प्रयोग करना भविष्य के लिए हितकारी नहीं होगा | और यदि यह करना प्रैक्टिकल न  लगे तो जो मिल रहा है उसमें सबसे अच्छा कैसे करना है इस प्रश्न पर ज्यादा ध्यान दीजिये, यही महत्त्वपूर्ण एवं प्रैक्टिकल है |

शुभकामनाओं सहित !