by Amit | Dec 6, 2022 | Uncategorized
अति सूधो सनेह को मारग है,जहाँ नेकु सयानप बाँक नहीं।इहाँ साँचे चलैं तजि आपनपौ,झिझकैं कपटी जे निसाँक नहीं॥ शब्दार्थ- स्नेह का, प्रीत का मार्ग एकदम सरल है, सीधा है | इसमें थोड़ा भी चतुर व्यक्तियों वाला, सयानों वाला टेढ़ापन नहीं है, बच कर निकलने की चतुराई नहीं है | इस...
by Amit | May 26, 2022 | हिंदी
इंसान की मूल पहचान उसकी छतरी नहीं, उसका व्यक्तित्व है.. प्रारब्ध से किसी न किसी छतरी तले जन्म तो पाया ही है, परन्तु उस छतरी के गुण-अवगुण मात्र छतरी के नीचे होने से नहीं नहीं मिल जायेंगे | ये आपके हैं.. विशिष्ट आपके हैं जो आपको विशिष्ट बनाते हैं.. आप की पहचान आपकी छतरी...
by Amit | Mar 22, 2022 | हिंदी
पुरुषार्थ कीजिये.. कामना मात्र से धर्म का पालन नहीं होता.. धर्म को रक्षा की नहीं.. पालन की आवश्कता है.. रक्षा तो हमारे द्वारा पालन किया गया धर्म हमारी करेगाप्रिय मित्रों,कल एक पोस्ट देखी, मदर टेरेसा का एक व्यंग्य चित्र जिसमें वो एक शिशु को गोदी में लिए उसे चम्मच से...
by Amit | Sep 25, 2021 | हिंदी
जय पराजय जीवन के सम अंग हैं । हार हमें और अधिक श्रेष्ठ बनने का कारण और अवसर प्रदान करती है। जब से हम ने जीत पर अत्यधिक खुश होना और आंखे तरेरना सीखा है तभी से हम हार को पचाना, उस से ऊर्जा लेना भूल गए हैं। जीत पर बल्लियों उछलने वाले, तनिक सी हार से निराशा के अंध कूप में...
by Amit | Sep 25, 2021 | हिंदी
बड़े पद पर आसीन बड़े भाई साहब के चेहरे को ध्यान से देखते हुए विजय ने पूछ ही लिया – खोये खोये से क्यों हैं ..? आप कुछ कहना चाहते हैं बड़े भैया | सुजय जी जैसे फट पड़े.. विजय, तुमने क्या अपना सर्वनाश ही करना ठान लिया है | मूर्खता की भी कोई हद होती है ! किराये के छोटे से...
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